हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध रचनायें

देवदास

देवदास

शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय, भारतीय साहित्य के प्रमुख स्तम्भ है। शरतचन्द्र के जिन उपन्यासों को सर्वाधिक लोकप्रियता मिली है, उनमे ‘देवदास‘ प्रमुख है। इसका प्रकाशन १९१७ में हुआ था। देवदास में उपन्यासकार ने वंशगत भेदभाव और लड़की बेचने की कुप्रथा के साथ – साथ निष्फल प्रेम की कहानी भी कही है। देवदास उपन्यास की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पर हिन्दी में अब तक तीन फिल्में भी बन चुकी है। आप इस उपन्यास को यहाँ से डाउनलोड करें, ख़ुद पढ़ें और अपने मित्रों को भी पढ़ने के लिए वितरित करें। मुझे आपके सुझावों की प्रतीक्षा है।

देवदास

अंधायुग

अंधायुग

धर्मवीर भारती, नई कविता के प्रमुख हस्ताक्षर है। ‘अंधायुग‘, इनके द्वारा लिखित एक काव्य नाटक है। इसका प्रकाशन सन १९५४ में हुआ था। अंधायुग की कथा का आधार महाभारत है। महाभारत का युद्घ अठारह दिन तक चला था, इस कृति का सम्बन्ध अठारहवें दिन की घटनाओं से है। इस कृति में आधुनिक सन्दर्भ भी है। द्वितीय विश्वयुद्घ के बाद राजनीतिक व सामाजिक घटनाओं में मूल्यों का संकट नाटककार को जैसा आज दिखाई दे रहा है, वैसे ही संकट महाभारत की उन स्थितियों में भी देखा जा सकता है। अंधायुग पर अस्तित्ववादी जीवन दर्शन का भी गहरा प्रभाव है।

अंधायुग

कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र

रामधारी सिंहदिनकर, हिन्दी काव्य जगत के प्रमुख स्तम्भ है। इनका महाकाव्य ‘कुरुक्षेत्र‘ आधुनिक युग की गीता है। गीता की तरह कुरुक्षेत्र में भी निष्काम कर्म की प्रेरणा दी गई है। कुरुक्षेत्र की कथावस्तु महाभारत के नर-संहार और ध्वंस के उपरांत की घटना पर आधारित है। महाभारत में भीषण नर-संहार देख कर युधिष्ठर के ह्रदय में ग्लानि और पश्चात्ताप की भावना उत्पन्न हो जाती है। वे सोचते है कि यह ध्वंस और नर-संहार उन्ही के वजह से हुआ । तब वे शान्ति और समाधान के लिए युद्घ भूमि में शर -शय्या पर लेटे हुए भीष्म -पितामह के पास जाते है। भीष्म उनका समाधान करते है और युधिष्ठर को निष्काम कर्म की प्रेरणा देते है। कुरुक्षेत्र की कथा सात सर्गो में विभक्त है।

कुरुक्षेत्र

कामायनी

कामायनी

जयशंकर प्रसादजी, हिन्दी काव्य-जगत के प्रमुख स्तम्भ है। प्रसाद जी द्वारा रचित ‘कामायनी‘ आधुनिक हिन्दी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है।इसका प्रकाशन सन १९३६ में हुआ। इसे हिन्दी साहित्य में तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के बाद हिन्दी का दूसरा अनुपम महाकाव्य माना जाता है। प्रसाद जी कला का सर्वोच्च शिखर कामायनी है। छायावादी युग का यह सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। इसे छायावाद का उपनिषद कहा जाता है।
कामायनी में मनु और श्रद्धा के माध्यम से मानव जीवन की सम्पूर्ण कहानी मनोवैज्ञानिक ढंग से कही गई है। इस महाकाव्य में १५ सर्ग है। इस काव्य के नायक मनु और श्रद्धा है। इसकी सारी घटनाएं प्रतीकात्मक है। कामायनी रूपक या मनोवैज्ञानिक काव्य मानी जाती है। इसके सम्बन्ध में डॉ.शिव कुमार शर्मा का कथन है कि ‘व्यक्तिवादी काव्य की चरम परिणति कदाचित प्रसाद जी की कामायनी में हुई है। मनु महाराज के मानसिक विकास और बाह्रा – संघर्ष के रूप में आज के व्यक्ति के विकासोन्मुख व्यक्तित्व की ही अंतर्कथा है। जिस आनंद की ओर प्रसाद जी ने ‘लहर’ में संकेत किया था ,उसी आनंद के कैलाश शिखर पर अंततः मनुमहाराज प्रतिष्ठित होते है। इस प्रकार आधुनिक युग का यह एकमात्र प्रतिनिधि महाकाव्य व्यक्तिवाद के विकास और पूर्ण परिणति युक्त प्रकाश की कहानी है।’

कामायनी

राम की शक्ति पूजा

राम की शक्ति पूजा

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तम्भ है। ‘राम की शक्ति पूजा‘, उनकी प्रमुख काव्य -कृति है। ‘निराला’ ने राम की शक्ति पूजा में पौराणिक कथानक लिया है, परन्तु उसके माध्यम से अपने समकालीन समाज की संघर्ष की कहानी कही है। राम की शक्ति पूजा में एक ऐसे प्रसंग को अंकित किया गया है, जिसमे राम को अवतार न मानकर एक वीर पुरूष के रूप में देखा गया है,जो रावण जैसे लम्पट, अधर्मी एवं अनंत शक्ति संपन्न दैत्यराज पर विजय पाने में जब तक समर्थ नही होते, जब तक वे शक्ति की आराधना नही करते है। इस काव्यकृति में कवि ने राम को संशयग्रस्त दिखाया है,उनका टूटकर हिम्मत हारना आदि राम कथा की परम्परा से हटकर वर्णन किया गया है। निराला वास्तव में यही सामाजिक सत्य उद्घाटित करना चाहते है कि राम और रावण का युद्घ हमारे समाज में शाश्वत एवं सनातन है।

राम की शक्ति पूजा

गीतांजलि

गीतांजलि

रविंद्रनाथ ठाकुर, विश्वविख्यात कवि, दार्शनिक, साहित्यकार और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता के रूप में जाने जाते है।’गीतांजलि‘, उनकी कविताओं का संग्रह है, जिस पर उन्हें सन १९१३ में नोबल पुरस्कार मिला था। इस रचना का मूल संस्करण बंगला में था, जिनमे अधिकतर भक्तिमय गाने थे। रविन्द्रनाथ सूफी रहस्यवाद और वैष्णव भक्ति से भी प्रभावित थे। उनकी इस काव्यकृति में प्रकृति प्रेम, ईश्वर के प्रति निष्ठां और मानवतावादी मूल्यों के प्रति समर्पण भाव को दर्शाया गया है। यह रविंद्रनाथ की सम्पूर्ण जिज्ञासा से उपजी रहस्योन्मुखकृति कृति है। यहाँ पर गीतांजलि का हिन्दी अनुवाद दिया जा रहा है। आशा है कि इस कृती के माध्यम से रविंद्रनाथ की सौंदर्यदृष्टि को समझने में सहायता मिलेगी।
गीतांजलि

मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी

मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी

मिर्ज़ा असद-उल्लाह ख़ां उर्फ “ग़ालिब” उर्दू और फारसी भाषा के महान शायर थे। उनका जन्म आगरा में हुआ था। वे मुग़ल सल्तनत के अंतिम बादशाह बहादुरशाह जफ़र के राज दरबारी कवि थे। ग़ालिब उर्दू और फारसी दोनों भाषाओं में कविता किया करते थे, लेकिन उन्हें प्रसिद्ध उर्दू भाषा ने ही बनाया ।
मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी

अनूदित कहानियाँ साहित्य में कहानी एक लोकप्रिय विधा मानी जाती है। कहानी की विशेषता इसी में है कि प्रबंध काव्य ,नाटक,उपन्यास , आदि सभी में कोई न कोई कथा कहानी रहती है।यहां पर भारत की विभिन्न भाषाओँ की प्रसिद्ध कहानियां दी जा रही है. इसमें रविन्द्रनाथ ठाकुर,अमृता प्रीतम ,गुलजार,राजेंद्र सिंह वेदी ,हरचरण सिंह चावला,पद्मा सचदेव ,सत्यजित राय आदि की प्रसिद्ध कहानियां संकलित है. इन कहानियों के माध्यम से भारतीय साहित्य के सौन्दर्य को समझा जा सकता है।

अनूदित कहानियाँ

रागदरबारी

रागदरबारी

रागदरबारी: श्रीलाल शुक्ल जी, हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार है। रागदरबारी उनका प्रसिद्ध उपन्यास है। इसका प्रकाशन सन १९६८ में हुआ । इसी उपन्यास पर उन्हें सन १९७० में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ । इस उपन्यास की कथावस्तु तो शिवपालगंज तक ही सिमित है, लेकिन इसकी अंतर्वस्तु देशव्यापी है। इस उपन्यास में उन्होंने स्वाधीनता के उपरान्त भारतीय समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार , अराजकता ,भाई-भतीजावाद ,लूट-खसोट ,अवसरवादिता तथा प्रजातंत्र के नाम पर चल रही बेईमानी को उन्होंने बड़ी ही कुशलता के साथ चित्रित किया है।

रागदरबारी

निहार - महादेवी वर्मा

निहार - महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा, का रचना संसार अत्यंत व्यापक है। जिसमें गद्य, पद्य, चित्रकला और बाल साहित्य सभी समाए हुए हैं। उनका रचनाकाल भी 50 से अधिक वर्षों तक फैला हुआ है और वे अपने अंतिम समय तक कुछ न कुछ रचती ही रहीं। इस लेख में उनकी लगभग समस्त रचनाओं को सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है।’निहार‘ उनकी प्रारंभिक कविताओं का संग्रह है। इस काव्य संग्रह में प्रकृति में मानवीय भावनाओं की भव्य झांकियां एवं विरह वेदना के चित्र प्रस्तुत किये गए है । यहाँ पर ‘निहार’ को ई -पुस्तक के रूप में दिया जा रहा है। आशा है कि इसके माध्यम से महादेवी वर्मा के साहित्य के सौन्दर्य को समझने में सहायता मिलेगी । विरहपूर्ण गीतों की गायिका महादेवी वर्मा आधुनिक युग की मीरा कही जाती है।

निहार

प्रेम चतुर्थी
प्रेमचंद की चार चुनिंदा कहानियों का संग्रह…

काला रजिस्टर
रवीन्द्र कालिया की व्यंग्य रचना…

विद्रोह
अमृत राय की कलम से एक रोचक उपन्यास…

सुमति
भाग्य और पुरुषार्थ में क्या प्रबल है ? गुरुदत्त का एक उपन्यास…

सप्त सरोज
प्रेमचन्द की कलम से सात लघु कहानियाँ…

धर्मयुद्ध
यशपाल का एक रोचक उपन्यास …

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