राजनीति

राजनीति

सुना है राजनीति एक क्लासिक फिल्म है

हीरो: बहुमुखी प्रतिभा का मालिक
रोज अपना नाम बदलता है

हीरोइन: हकूमत की कुर्सी वही रहती है
ऐक्स्ट्रा: लोकसभा और राजसभा के मैम्बर
फाइनेंसर: दिहाड़ी के मज़दूर,
कामगर और खेतिहर
(फाइनांस करते नहीं,करवाये जाते हैं)
संसद: इनडोर शूटिंग का स्थान
अख़बार: आउटडोर शूटिंग के साधान
यह फिल्म मैंने देखी नहीं
सिर्फ़ सुनी ही है
क्योंकि सैन्सर का कहना है —
‘नॉट फॉर अडल्ट्स।’

अमृता प्रीतम की अन्य कविताएं

  • दावत
  • ऐ मेरे दोस्त! मेरे अजनबी!
  • मेरा पता
  • दाग़
  • आओ फिर से दिया जलाएँ
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