अशोक चक्रधर

अशोक चक्रधर की कविताएं

एक परिचय

अशोक चक्रधर

अशोक चक्रधर

अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम नहीं, जो दक्षिण दिल्ली में रहता है, इन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘जीवन पर्यंत शिक्षण संस्थान’ में हिन्दी समन्वयक है और जामिआ मिल्लिआ इस्लामिया नामक विश्वविद्यालय में तीस बरस तक हिंदी पढ़ाता रहा है, एक संजीदा समीक्षक, लेखक और प्रोफ़ेसर है। अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम भी नहीं है, जो देश-विदेश के कविसम्मेलनों के लिए एक ज़रूरी कवि है और ‘कहकहे’ से लेकर ‘रंग-तरंग’ तक, ‘पोल टॉप टैन’ से लेकर ‘छोटी सी आशा’ तक और ‘वाह वाह’ से लेकर ‘चकल्लस’ तक टी.वी. पर मौजूद रहता है। अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम भी नहीं है, जो लोक-संगीत में गहरी पैठ रखता है और यदा-कदा गा भी देता है। अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम भी नहीं है, जो कि एक अच्छा चित्रकार है, कितनी ही प्रदर्शनियों में उसके बनाए हुए चित्र और पोस्टर लगाए जाते हैं। अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम भी नहीं है, जो कि एक अच्छा फ़िल्मकार है, विभिन्न सामाजिक समस्याओं पर उसने कितने ही टेलीफिल्‍म, धारावाहिक और वृत्तचित्र बनाए हैं, एक सम्पूर्ण मीडिया-व्यक्तित्व है।

अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम भी नहीं है जिसने अपनी मल्टी-मीडिया प्रस्तुतियों से हिंदी को हाई-टैक करने की पहल करी। अशोक चक्रधर सिर्फ़ उस व्यक्ति का नाम भी नहीं है जिसने मंचीय हास्य-व्यंग्य को अपने विशिष्ट संचालन-कौशल के साथ नए-नए आयाम दिए।

दरअसल, अशोक चक्रधर नाम है अनेक प्रकार की प्रतिभाओं के एक समुच्चय का। अलग-अलग क्षेत्रों में उसने जो किया सो किया, लेकिन सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि उसने हर क्षेत्र में मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठापित किया।

अशोक चक्रधर हिंदी के लोकप्रिय मंचीय कवियों में से एक हैं. हास्य की विधा के लिये इनकी लेखनी खास तौर से जानी जाती है. कवि सम्मेलनों की वाचिक परंपरा को टेलीविजन के माध्यम से घर घर में पहुँचाने का श्रेय गोपालदास नीरज, शैल चतुर्वेदी, सुरेंद्र शर्मा, ओमप्रकाश आदित्य आदि के साथ-साथ इन्हें भी जाता है.

जन्म : 8 फरवरी 1951, खुर्जा (उ.प्र.) में।

शिक्षा : एम.ए., एम.लिट., पी-एच.डी. (हिंदी), ‘कैरिअर अवार्ड’, उत्तर पी-एच.डी. शोध-कार्य (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)

संप्रति : प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी एवं मिडिया अध्ययन विभाग, जामिआ मिल्लिआ इस्लामिया (केंद्रीय विश्वविद्यालय) नई दिल्ली।

प्रकाशित रचनाएँ –
– बूढ़े बच्चे, भोले भाले, तमाशा, चुटपुटकुले, सो तो है, हँसो और मर जाओ, ए जी सुनिए, इसलिए बौड़म जी इसलिए, खिड़कियाँ, बोल-गप्पे, जाने क्या टपके, देश धन्या पंच कन्या, चुनी चुनाई, सोची समझी।

नाटक – रंग जमा लो, बिटिया की सिसकी, बंदरिया चली ससुराल, जब रहा न कोई चारा, लल्लेश्वरी।

इसके अतिरिक्त बाल साहित्य, प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य, समीक्षा, अनुवाद, काव्यानुवाद, पटकथा आदि अनेकों विधाओं में लेखन। फ़िल्म, टेलीफ़िल्म, वृत्तचित्र, धारावाहिक, फीचर फ़िल्म व दूरदर्शन में लेखन, निर्देशन व अभिनय के साथ-साथ कविसम्मेलनों के अत्यंत लोकप्रिय व्यक्तित्व।

आप सिडनी यूनिवर्सिटी, सिडनी, आस्ट्रेलिया में विज़िटिंग स्कॉलर, संचालन समिति, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार, गवर्निंग बॉडी, शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली व सांस्कृतिक सचिव, ब्रज कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य, काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट, हाथरस के ट्रस्टी तथा हिंदी सलाहकार समिति, ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, हिमाचल कला संस्कृति और भाषा अकादमी, हिमाचल प्रदेश सरकार, शिमला के भूतपूर्व सदस्य के पदों को सुशोभित कर चुके हैं।

www.chakradhar.in पर उनके जालघर की यात्रा की जा सकती है।
email: baudamji@hotmail.com

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