महाभारत कथा

महाभारत कथा

महाभारत कथा

भाग १

चन्द्रवंश से कुरुवंश तक की उत्पत्ति
भीष्म का जन्म तथा भीष्म प्रतिज्ञा

भाग २

वेद व्यास के जन्म की कथा
कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य की कथा
धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर के जन्म की कथा

भाग ३

पाण्डु का राज्य अभिषेक
कर्ण का जन्म

भाग ४

एकलव्य की गुरु भक्ति
लाक्षाग्रह षड्यंत्र
द्रौपदी स्वयंवर

भाग ५

इन्द्रप्रस्थ की स्थापना
पाण्डवों की विश्व विजय और उनका वनवास
पाण्डवों की तीर्थयात्रा

भाग ६

अर्जुन को दिव्यास्त्रों की प्राप्ति
भीम द्वारा जयद्रथ की दुर्गति
युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन की रक्षा

भाग ७

कीचक वध तथा कौरवो की पराजय
पाण्डवों का राज्य लौटाने का आग्रह और दोनो पक्षो की कृष्ण से सहायता की माँग

भाग ८

शांति दूत श्रीकृष्ण, युद्ध की शुरुवात तथा श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश
भीष्म द्रोण वध
कर्ण, शल्य और दुर्योधन वध

भाग ९

दुर्योधन वध और महाभारत युद्ध की समाप्ति
यदुकुल का संहार
पाण्डवों का स्वर्गगमन

द्वापर युग में कौरवों तथा पांडवों के बीच हुए संघर्ष की रोमांचक कहानी को बड़ी ही सरल भाषा में महाभारत में प्रस्तुत किया गया है, जो हर वर्ग के पाठक के लिए पठनीय है। महाभारत कथा में सत्य की असत्य पर और न्याय की अन्याय पर विजय को इतनी सरल भाषा में वर्णन किया गया है कि हर छोटा-बड़ा पढ़कर समझ सकता है और अच्छाइयों को ग्रहण कर सकता है।

समस्त भारतीय साहित्य में महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत भारतीय संस्कृति, सभ्यता और दर्शन का आधार ग्रंथ है। यह ग्रंथ अपने समय की भारतीय संस्कृति तथा तत्कालीन जनजीवन के नैतिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक पहलुओं पर प्रकाश डालता है। स्पष्टतः महाभारत ज्ञान का असीम भंडार है। इस महाकाव्य में 100217 श्लोक हैं जिन्हें 18 पर्वों में बाँटा गया है। यह महाकाव्य एक जगमगाते हुए प्रकाश-स्त्रोत के समान है। यदि इसे निष्ठापूर्वक पढ़कर इसकी शिक्षाओं का मनन किया जाए तो यह अज्ञान के अंधकार का विनाश कर मस्तिष्क को ज्ञान से युक्त बनाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर प्रस्तुत पुस्तक में महाभारत ग्रंथ से संबंधित विभिन्न रोचक और ज्ञानवर्द्धक कथाओं का संकलन किया गया है जो पाठकों का निश्चित ही मार्गदर्शन करेंगी।

महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत की गणना विश्व के महान महाकाव्यों में की जाती है। यह ग्रंथ अपने समय की भारतीय संस्कृति तथा तत्कालीन जनजीवन के नैतिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक पहलुओं पर प्रकाश डालता है। इस ग्रंथ में वैदिक दर्शन, विभिन्न पुराणों के सारांश, विभिन्न आकाशीय पिंडों के प्रभाव, समकालीन न्याय-व्यवस्था, शिक्षा-प्रणाली, औषध-विज्ञान, दान-दक्षिणा की रीतियाँ, ईश्वर के प्रति श्रद्धा, विभिन्न तीर्थ-स्थानों, वनों, पर्वतों, नदियों तथा सागरों का समावेश है। स्पष्टतः महाभारत—ज्ञान का असीम भंडार है। यह ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जो राजनीति के सिद्धांतों का भी प्रतिपादन करता है तथा साथ ही जीवन-दर्शन के विभिन्न अंगों की व्यख्या भी। यही नहीं, यह प्राचीन आर्य संस्कृति का इतिहास भी प्रस्तुत करता है। इसी कारण इसे पाँचवाँ वेद’ भी माना गया है।

इस महाकाव्य में 100,217 श्लोक हैं जिन्हें 18 पर्वों में बांटा गया है। इस ग्रंथ का आरंभिक नाम था-जय। परंतु कालांतर में इसे भरत पुराण का नाम दे दिया गया और बाद में यह महाकाव्य महाभारत के नाम से विख्यात हो गया। श्रीमद्भगवद्गीता इस महाकाव्य की ही एक भाग है। कौन नहीं जानता कि गीता समूचे आध्यात्मिक दर्शन का सारांश है ? इस महाकाव्य के महान् रचयिता वेद व्यास ने गीता को महाकाव्य के दो मुख्य पात्रों के आपसी वार्तालाप के रूप में प्रस्तुत किया है। द्वारिका-नरेश श्रीकृष्ण को उपदेशक के रूप में चित्रित किया गया है जबकि अर्जुन नामक महान् धनुर्धर पांडव को उपदेशित योद्धा के रूप में दिखाया गया है। स्पष्ट है कि महाभारत के अध्ययन से पाठक को सभी बड़े-छोटे पापों से मुक्ति मिल जाती है।

यह महाकाव्य एक जगमगाते हुए प्रकाश-स्रोत के समान है। यदि इसे निष्ठापूर्वक पढ़कर इसकी शिक्षाओं का मनन किया जाए तो यह अज्ञान के अंधकार का विनाश करने के उपरांत मस्तिष्क को सर्वग्राही ज्ञान से युक्त करके उसे प्रकाशमान बना देता है। हमने इस पुस्तक में महाभारत ग्रंथ से संबधित विभिन्न रोचक और ज्ञानवर्धक कथाओं का संग्रह किया है जो पाठकों का निश्चित ही जीवन-मार्गदर्शन करेंगी।

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