कश्‍मीर: इस रात की सुबह है भी?


कश्‍मीर में शांति कैसे आए, इसका जवाब ढूंढने के लिए नई दिल्‍ली में सभी राजनीतिक दलों के नेता बैठे तो सही, लेकिन जवाब मिला नहीं। इससे पहले कैबिनेट की सुरक्षा समिति (सीसीएस) भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकी थी। पर क्‍या यह सह नहीं है कि हल ढूंढने की यह ‘बेताबी’ अगर शुरुआत में ही दिखाई जाती तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।

हिंसा का ताजा दौर 1 जून को तौफीक अहमद मट्टू की मौत से शुरू हुआ। तब न तो राज्‍य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और न ही केंद्र सरकार ने चिंता दिखाई। हिंसा बढ़ती गई और साढ़े तीन महीने में 90 लोगों की जान चली गई। इस बीच स्थिति राज्‍य सरकार के हाथ से निकलती चली गई। फायदा अलगाववादियों ने उठाया। वे सक्रिय होते गए। भाड़े पर पत्‍थरबाज जुटा कर अशांति की आग को हवा देते गए। वे आजादी की मांग को तूल देने लगे। तब राज्‍य सरकार भी नींद से जागी और केंद्र को भी लगा कि मामला गंभीर है।

अब राज्‍य सरकार समस्‍या के समाधान के बतौर एएफएसपीए को हटाने या स्‍वायत्‍तता देने जैसे उपाय सुझा रही है। मुख्‍यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला का कहना है कि समस्‍या का राजनीतिक हल ही हो सकता है। केंद्र सरकार कह रही है कि मुख्‍यमंत्री राज्य की आम जनता से दूर हो गए हैं। सेना कह रही है कि राज्‍य में हालात ऐसे हैं कि एएफएसपीए बहाल रखना जरूरी है। इसके तहत सेना को कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिनका इस्‍तेमाल कर वे गड़बड़ी फैलाने वालों पर विशेष सख्‍ती कर सकते हैं। जनता, भले ही अलगाववादियों के बहकावे में आकर, आजादी की बात कर रही है। ऐसे में हल कहां है और क्‍या है?

उल्‍टे समस्‍या गंभीर होने के आसार दीख रहे हैं। अलगाववादी मजबूत हो रहे हैं। इनका सीधा संबंध पाकिस्‍तान में बैठे आकाओं से है और वे इन्हीं के इशारे पर काम कर रहे हैं। खबर है कि जमीयत-उल-मुजाहिदीन के कमांडर आशिक हुसैन फक्‍तू ने जेल में बैठे-बैठे ही अपना नेटवर्क मजबूत कर लिया है। वह 17 साल से जेल में बंद है और अब जेल से ही अपनी अलगाववादी गतिविधियां चला रहा है।

इतना होने पर भी अगर नेताओं का रुख जस का तस बना रहा तो क्‍या धरती के इस जन्‍नत (कश्‍मीर) पर शांति लौट पाएगी?

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2 विचार “कश्‍मीर: इस रात की सुबह है भी?&rdquo पर;

  1. इस देश को जरुरत है एक ऐसी सारकार की जो दंगो को जातीय रंग न दे और इनसे निपट सके … आतंकवाद को भगवा या हरा रंग देने से इसका हल नहीं किया जा सकता , जरुरत है इसे ठीक ढंग से हल करने की नहीं तो जो हाल कश्मीर का है वही इस सारे देश का होगा …..

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    (आप क्या चाहते है – गोल्ड मेडल या ज्ञान ? )
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_16.html

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