कश्‍मीर: इस रात की सुबह है भी?


कश्‍मीर में शांति कैसे आए, इसका जवाब ढूंढने के लिए नई दिल्‍ली में सभी राजनीतिक दलों के नेता बैठे तो सही, लेकिन जवाब मिला नहीं। इससे पहले कैबिनेट की सुरक्षा समिति (सीसीएस) भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकी थी। पर क्‍या यह सह नहीं है कि हल ढूंढने की यह ‘बेताबी’ अगर शुरुआत में ही दिखाई जाती तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।

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जब पाकिस्तान के 65 टैंक किए थे तबाह


सन् 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सात से 11 सितंबर तक चली फिल्लौर की लड़ाई को आज भी सेना इतिहास में सबसे घातक जंग का दर्जा दिया जाता है। यह एक ऐसा युद्ध था जिसमें भारतीय सेना ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय उस समय के सबसे आधुनिक अमेरिका निर्मित पैटर्न टैंकों सहित पाकिस्तान की पूरी डिवीजन को तबाह कर दिया था।

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डॉ. फारुख सलीम का ख़त


हम भारतीय अपने नेताओं के बारे में चाहे जो सोचें और अपने लोकतंत्र को प्रदूषित और भ्रष्ट करने के लिए इनको कोसते रहें, शायद पाकिस्तान के लोग हमारी इन बातों से कतई इत्तफाक नहीं रखते। फौजी शासन के आंतक के साये में जी रहे पाकिस्तान के लोगों को इस बात पर शर्म महसूस होती है कि भारत ने पाकिस्तान को हर मामले में पीछे छोड़ दिया है और दुनिया में पाकिस्तान का कोई सम्मानजनक वजूद नहीं है। हमारे पाठक श्री अशोक मंगलानी ने हमें पाकिस्तान के एक जानेमाने पत्रकार डॉ. फारुख सलीम द्वारा एक पाकिस्तानी अख़बार में लिखा एक लेख भेजा है जिसमें उन्होंने इस बात को बेहद शोधपूर्ण तरीके से सामने रखा है कि आज़ादी के बाद भारत कहाँ से कहाँ पहुँच गया और पाकिस्तान अपनी पहचान तक नहीं बना पाया है।

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