गदर के 153 साल


इतिहास में सब कुछ सत्य नहीं होता। इतिहास में अधिकांशतः तथ्य होता है। पसंदीदा तथ्य को आधार मानकर अधिसंख्य इतिहासकार अपनी इच्छानुसार तर्क की मूरत गढ़ते हैं, और सच्चाई का आभास पाने के लिए अपनी-अपनी शैली में उस पर रंग-रोगन करते हैं। भारतीय इतिहास में 1857 के अध्याय के साथ ऐसा ही हुआ है। इसमें क्या हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ—आदि प्रश्नों पर तो विवाद है ही, इसके नामकरण पर भी गहरा विवाद है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, विद्रोह, महाविद्रोह, गदर, सिपाही विद्रोह, क्रांति, महाक्रांति, सैन्य-क्रांति, महासंग्राम, विप्लव, महाविप्लव, क्रांतिकारी युद्ध, राष्ट्रीय युद्ध आदि अनेक नामों से इसे याद किया जाता है। इसकी सफलता को लेकर भी संदेह किया जाता है।
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